बुधवार, 20 अप्रैल 2016

Nayee Khabar

जल संकट: चीन जैसी पतली हुई भारत की हालत

वर्षों से चली आ रही लापरवाहियों के कारण देश आज गंभीर जल संकट से जूझ रहा है। पारा 46 डिग्री तक पहुंच गया है। हालात और बदतर होने की आशंका से सरकार किसानों को ड्रिप इरिगेशन के लिए प्रोत्साहित करने के लिए फंडिंग करने पर विचार कर रही है। साथ ही, जरूरत से ज्यादा भूजल का इस्तेमाल करने पर पेनल्टी और एक मॉडल वॉटर लॉ बनाने की भी तैयारी है। भारत सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि चीन में इस तरह पानी की कमी होने पर संकट का ऐलान कर दिया गया था।

जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा नदी से जुड़े विभाग के सचिव शशि शेखर ने कहा, 'पानी की कमी हमारे लिए बहुत बड़ी समस्या है।' उन्होंने बताया, 'अगर हम आंकड़ों को दखें तो साल 2000 में प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रति साल 2000 क्यूबिक मीटर पानी था। आज हम 1500 घन मीटर पर आ गए हैं और अगले 15 साल में यह आंकड़ा 1100 घन मीटर हो जाएगा। 1500 क्यूबिक मीटर प्रति व्यक्ति प्रति साल भी जल संकट के दायरे के भीतर है। चीन ने 1500 क्यूबिक मीटर प्रति व्यक्ति प्रति साल के आंकड़े पर क्राइसिस का ऐलान कर दिया था। हम इस स्तर से नीचे जा सकते हैं।'

जल संकट से निपटना अब सरकार की जिम्मेदारी बन गई है। पिछले दो साल से मॉनसून कमजोर रहा है, जिससे देश के कई इलाकों में सूखा है और जलाशयों में बहुत कम पानी है। शेखर ने कहा कि इस संकट के पीछे हमारे कई सालों की लापरवाही है। पारंपरिक तालाबों और जलाशयों की देखरेख नहीं की गई और बहुत ज्यादा पानी इस्तेमाल वाली खेती और औद्योगिक डिमांड के कारण भूजलस्तर काफी नीचे चला गया। सबसे ज्यादा सूखा ग्रस्त राज्यों में से एक महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित इलाकों में ट्रेन से पानी भेजा जा रहा है।

उन्होंने कहा, राज्य में जितना भूजल बचा है उसे संभालने के बजाय गन्ने की खेती और बीयर प्लांट पर बहस शुरू हो गई है। ओडिशा के टीटलागढ़ में सबसे ज्यादा 46 डिग्री तापमान है। मौसम विभाग ने कहा है कि अगले कुछ हफ्तों तक लू चलती रहेगी। शेखर ने कहा कि खेती में पानी की जरूरत कम करने के लिए ड्रिप इरिगेशन जरूरी है और सरकार को किसानों की इस कोशिश में मदद करनी पड़ेगी।

"महेन्द्र भाई पटेल रोहिट