बुधवार, 11 मई 2016

Nayee Khabar

‘लोकपाल’ को लेकर गंभीर क्यों नहीं केन्द्र सरकार? SC


सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र की एनडीए सरकार से पूछा कि दो साल बीत जाने के बाद भी क्यों लोकपाल की नियुक्ति नहीं हो रही है। क्या आपको लोकपाल नियुक्त करने में कोई परेशानी आ रही है। चीफ जस्टिस टी एस ठाकुर की अध्यक्षता में एक बेंच ने मामले की सुनवाई की, उन्होने केन्द्र सरकार से पूछा कि इस ओर सरकार क्यों ध्यान नहीं दे रही है, माननीय कोर्ट ने मामले पर जबाव भी मांगा।
विदित हो कि सुप्रीम कोर्ट में एक एनजीओ की ओर से पीआईएल लगाया गया था, इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केन्द्र सरकार से ये बातें पूछी, केन्द्र सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल मुकुल रहतोगी जबाव देने के लिए उपलब्ध थे। देश के चर्चित और वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण एनजीओ की ओर से जिरह कर रहे थे, उन्होने कोर्ट से कहा कि केन्द्र सरकार भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है, तभी तो दो साल बीत जाने के बाद भी केन्द्र सरकार इस ओर विचार भी नहीं कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल से साफ शब्दों में पूछा कि कानून बनें लगभग ढ़ाई साल बीत चुका है, नई सरकार आए होने इस महीने दो साल की हो जाएगी, लेकिन लोकपाल को लेकर वो गंभीर क्यों नहीं है, उन्होने साथ ही केन्द्र सरकार से कहा कि अगर इसकी नियुक्ती को लेकर कोई परेशानी सामने आ रही है तो वो कोर्ट को बताएं, इस मसले पर कोर्ट ने केन्द्र सरकार से जल्द ही जबाव मांगा है।

ज्ञात हो कि लोकपाल लॉ के अनुसार जनवरी 2014 में जो कानून बनाया गया था, उसमें जरुरी है कि एक नौकरशाह को अपनी निजी संपत्ति के साथ-साथ अपने पति या फिर पत्नी की भी संपत्ति को सार्वजनिक करना होगा। जबकि एनजीओ की दलील है कि नरेन्द्र मोदी सरकार ओरिजनल क्लॉज से भागने की कोशिश की, जिसमें उन्होने सिर्फ पर्सनल संपत्ति की ही जानकारी दी।

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