सोमवार, 1 अगस्त 2016

Nayee Khabar

सिस्टम से हुए परेशान, बोले- मरने से पहले कहकर जाऊंगा मोदी को वोट मत देना

यमुनानगर। पेंशन लेने के लिए लाइन में लगे हरियाणा के यमुनानगर के निवासी सूरजा राम ने कहा भाई एक बार मोदी वोट देकर गलती की है। दोबारा नहीं करुंगा। मरने से पहले भी बच्चों को यह कहकर जाऊंगा कि कभी मोदी की पार्टी को वोट मत देना। बेशक किसी दूसरी पार्टी पर विश्वास कर लेना।

लाइन में लगे विकलांग जगदीश व उसकी पत्नी सुनहरी के भी बयान कुछ इसी तरह के थे। वे बोले पहले घर के पास ही पेंशन मिल जाती थी। लेकिन अब पेंशन लेने के लिए ठोकरे खानी पड़ रही हैं। दरअसल पेंशन खाते न खुलने व कुछ दूसरे कारणों की वजह से नगर निगम के कई वार्डों के लोगों को पेंशन नहीं मिल पाई। अफसरों ने निगम आफिस में ही रहे लोगों को पेंशन देने का निर्णय लिया है।


बुधवार सुबह ही पेंशन लेने वालों की निगम में भीड़ उमड़ पड़ी। देखते ही देखते सैकड़ों बुजुर्गों की लंबी-लंबी लाइनें लग गई। पेंशन लेने के लिए बुजुर्गों में जमकर धक्का-मुक्की भी हुई। खासकर बुजुर्ग महिलाएं तो पेंशन लेने के लिए आपस में झगड़ती रही। भीड़ के सामने पेंशन देने वाले कर्मचारी थोड़े पड़ गए। लाइनों में लगे बुजुर्गों ने अफसरों के साथ सरकार को भी जमकर कोसा।
साथ ही बैंक अधिकारियों पर भी उन्हें जानबूझकर तंग करने के आरोप लगाए। बुजुर्गों के साथ उनके परिजन व बच्चे भी घंटों लाइन में लगे रहे। हालांकि जल्द पेंशन मिलने के बाद कुछ लोगों के चेहरे पर तो खुशी भी दिखाई दी। लेकिन इन लोगों ने भी सिस्टम पर उंगली उठाई।


नई व्यवस्था में पेंशन खाते खुलने के बावजूद छोटी खामियों में बुजुर्गोंं का दर्द बढ़ा दिया है। चार दिन से पेंशन लेने के लिए भटक रहे हमीदा के जगदीश ने बताया कि वह अफसरों की गलती से बेहद परेशान हैं। उसने बताया कि राशन कार्ड व बैंक बुक में उसका नाम बिल्कुल सही है। लेकिन पेंशन लिस्ट में अफसरों ने उसका नाम जगदीश की जगह जगजीवन लिख दिया। अब इसमें मेरा क्या कसूर है। वहीं जगदीश ने बताया कि वह व उसकी पत्नी सुनहरी देवी जन्म से विकलांग हैं। पेंशन से ही उसके परिवार चल रहा है। कई बार पूछने पर भी अफसर उसे कोई सही जबाव देने को तैयार नहीं है।
यमुनानगर में 1.12 लाख 717 पेंशन उपभोक्ता हैं। इनमें बुजुर्गों के साथ विकलांग भी शामिल हैं। सबसे ज्यादा 23551 पेंशन उपभोक्ता यमुनानगर में हैं। बाकी सभी उपभोक्ता जगाधरी व दूसरे ग्रामीण कस्बों के हैं। इनके खाते खोलने के लिए 173 बैंकों को अधिकृत किया गया है। अभी तक 85 फीसदी खाते खोलने का काम पूरा हो चुका है। सात गांवों के बुजुर्गों को तो बैंक के जरिए पेंशन देने का काम भी पूरा हो गया है। हालांकि शहरी क्षेत्र के लोगों को अभी इस सुविधा के लिए इंतजार करना पड़ता है।

बैंक खाता न होने की वजह से पहले कई वार्डों में पेंशन बांटने का काम रोक दिया गया था। इसी वजह से बुजुर्गों में रोष व्याप्त हो गया। बाद में कुछ वार्ड के नुमाइंदों ने डीसी को मामले से अवगत करवाया। तब डीसी डॉक्टर फुलिया ने जिला समाज कल्याण अधिकारी को तुरंत बचे उपभोक्ताओं को पेंशन उपलब्ध कराने के आदेश दिए। तब निगम व वार्डों में पेंशन बांटने का काम शुरू हो पाया।
'85 फीसदी पेंशन उपभोक्ताओं के बैंक खाते खुल चुके हैं। जल्द ही बचे उपभोक्ताओं के खाते भी खुल जाएंगे। तब पेंशन के लिए बुजुर्गों को कहीं धक्के नहीं खाने पड़ेंगे। सात गांवों के बुजुर्गों को इस बार बैंक के जरिए पेंशन दी गई है। जल्द ही दूसरे उपभोक्ताओं को भी लाइन में लगने से राहत मिल जाएगी।

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ई ख़बर की रिपोर्ट