गुरुवार, 22 सितंबर 2016

Nayee Khabar

राजस्थान में बाल संरक्षण पर छह माह का पाठ्यक्रम शुरू

अनेक बार बच्चे ढाबों पर बर्तन धोने, खाना परोसने, भीख मांगने व घर पर नौकर का काम कराते हुए मिलते हैं।


राजस्थान के सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री डॉ अरुण चतुर्वेदी ने बुधवार को यहां कहा कि बच्चों के अधिकारों के संरक्षण के लिए समाज को संवदेशील होना होगा। बाल संरक्षण पर सर्टिफिकेट कोर्स के शुभारंभ के मौके पर चतुर्वेदी ने कहा कि पर्याप्त कानून होने के बावजूद जागरूकता व संवेदनशीलता के अभाव में बच्चों के अधिकारों का हनन हो रहा है।


अत: बच्चों के अधिकारों के संरक्षण व उनके समूचित शारीरिक, मानसिक विकास के साथ-साथ उन्हें श्रेष्ठ नागरिक बनाने के लिए समाज के सभी वर्गों को संवेदनशील होकर कार्य करना होगा।  डॉ चतुर्वेदी बुधवार को सरदार पटेल पुलिस, सुरक्षा व आपराधिक न्याय विश्वविद्यालय, जोधपुर के बाल संरक्षण केंद्र, जयपुर व यूनिसेफ के सहयोग से संचालित किए जाने वाले ‘बाल संरक्षण पर सर्टिफिकेट कोर्स’ के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि राज्य में बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए बाल कल्याण समिति, किशोर न्याय बोर्ड एवं बाल सुधार आयोग बने हुए हैं। लेकिन कानूनों की जानकारी व जन जागरूकता के अभाव में उनके पास बच्चों के शोषण के मामले कम आते हैं। अनेक बार बच्चे ढाबों पर बर्तन धोने, खाना परोसने, भीख मांगने व घर पर नौकर का काम कराते हुए मिलते हैं। इसके बावजूद आम जन बालकों के अधिकारों के उल्लंघन के मामलों की अनदेखी करते हुए नजर आते हैं।

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